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Shani Grah ki Shanti

शनि की साढ सती ढया और सोने चांदी के पाया फल का विचार

सन 2022 -23 विक्रमी संवत 2076 के मध्य में 24 जनवरी 20 20 से मकर राशि में संचार कर रहे शनि देव आगामी संवत 2075 के मध्य में संवत के शुरू में 2 अप्रैल 2022 ईस्वी से 28 अप्रैल 2022 तक मकर राशि में ही संचार करेंगे उसके बाद 29 अप्रैल 2022 को शनि देव कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे,
5 जून को वक्री होकर पुनः 12 जुलाई 2022 में मकर राशि में संचार करेंगे, तारीख 23 अक्टूबर 2005 ईस्वी से मार्गी होकर तारा जनवरी 2023 से 21 मार्च 2023 तक पुनः कुंभ राशि में संचार करेंगे
शनि देव वक्री और मार्गी
शनिदेव 5 जून 2022 ईस्वी को कुंभ राशि में संचार सील वक्री होकर 23 अक्टूबर 2022 को मकर राशि में संचार कालीन मार्गी होकर संचार करेंगे शनि मंगल अधिक क्रूर हो गए तो

इस बात का ध्यान रखा जाए कि एक क्रूर ग्रह किसी राशि में गोचर वश जब वक्री होकर घूमते हैं तो और भी अधिक क्रूर और अशुभ फल देने वाले बन जाते हैं गुरु शुक्र और सौम्य ग्रह अपनी राशि में वक्री होकर अधिक शुभ फल प्रदान करते हैं
शनिदेव जब गोचर में वक्री अवस्था में संचार करेंगे तो जातक जातिका को मानसिक और शारीरिक तौर पर कष्ट देंगे पैसे संबंधी परेशानियां होगी
बिमारीया और रोग प्रकट होने लगते हैं समाज में भी कहीं कहीं राजनीति टकराव व्यवस्था बहुत ज्यादा महंगाई राजनीतिक उल्टी फेर और भी रोग उपद्रव हिंसक घटनाएं असंतोष प्राकृतिक प्रकोप असुरक्षा का वातावरण बनता है

कब और क्यों होती है शनि की साढ़ेसाती 

12 राशियों पर शनि देव की सती मैया का प्रभाव कब और कैसे होता है यह समझ लेना आवश्यक है सौरमंडल में ग्रहों के मध्य शनि पृथ्वी में सबसे अधिक दूरी पर संचार करता रहता है शनि एक राशि पर लगभग ढाई वर्ष तक 2 साल 6 महीने के काल में घूमता रहता है
गोचर शनि जब किसी राशि में प्रवेश करता है तब शनि उस राशि से बाहर भी राशि को आगे वाले ढाई वर्ष तक कष्ट देता है जिस राशि में प्रवेश किया गया हो उसे 5 वर्ष तक और अपनी से दूसरी राशि को लगभग साढे 7 वर्ष तक अशुभ प्रभाव करेगा इस प्रकार पहली दूसरी और 12 पर लगभग 7:30 वर्षों तक प्रभावित करने के कारण जाने के लिए चक्कर प्रक्रिया शनि की साढ़ेसाती कहलाती है शनि के प्रभाव स्वरूप जातक को शरीर कष्ट मानसिक तनाव घर में कलेश धन संबंधी की उलझने और खर्चों की अधिकता रहती है
बनते कार्यों में विघ्न बाधाएं आती हैं रोग एवं शत्रुओं काव्य रहता है संतान एवं परिवार सबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है गोचर शनि चंद्र राशि से चौथे आठवें पर संचार करता है तो शनि की ढैया कहलाती है जय लगभग ढाई वर्ष के लिए होती है
और इसका प्रभाव भी अशोक ही माना जाता है शनि की ढैया के प्रभाव स्वरूप जातक जातिका को दौड़-धूप पड़ी रहती है अनावश्यक खर्च रहते हैं गुप्त चिंताएं लग जाती हैं रोग शोक कलह क्लेश धन हानि बंधु विरोध कार्यों में विघ्न ka सामना करना पड़ता है शनि के पाय का विचार
शनिदेव के समय 1,6,11no.भाव में हो तो सोने का paya होता है जब दूसरे पांचवें भाव में हो तो चांदी का paya होता है और यदि तीसरे सातवें भाव में हो तो तांबे के पाए में जन्म होता है चौथे स्थान में हो तो लोहे के पाए का विचार होता है पाया फल विचार
सोने का पाया हो तो जातक को इस अवधि में संघर्षपूर्ण परियों का सामना करना पड़ता है परिवारिक रोग, मानसिक तनाव अधिक रहता है चांदी का पाया हो तो जातक को किए गए प्रयासों में धीरे-धीरे सफलता मिलती है तांबे का पाया हो तो इसका फल शुभ होता है कार्य व्यवसाय में लाभ और उन्नति के मार्ग प्रशस्त होते हैं
वाहनों आदि का भी सुख मिलता है विदेश विदेश में यात्राओं के अवसर प्राप्त होते हैं लोहे का पाया हो तो जातक को आर्थिक परिवारिक परेशानियां अधिक होती हैं और स्वस्थ में गड़बड़ करती हैं दुर्घटना में चोट आदि का भय रहता है और प्रयास करने पर भी लाभ कम कर जाता

 

Shani Grah ki Shanti

Shani Grah ki Shanti

Shani Grah ki Shanti

दोस्तों आज हम बात करेंगे शनि ग्रह की आप सबको पता ही है कि शनि ग्रह सभी ग्रहों से ज्यादा देर तक आपकी राशि पर रहता है और आप को सबसे ज्यादा प्रभाव यही ग्रह करा देता है एक राशि पर बैठकर यह है अपनी अगली राशि को देख रहा होता है और अपनी से पिछली राशि के ऊपर इसका प्रभाव होता है मतलब यह 3 राशियों के ऊपर अपना प्रभाव दिखाता है इसलिए एक राशि पर यह ढाई साल तक रहता है अर्थात 2 साल 6 महीने तक एक राशि पर रहता है और अगली राशि को यह इतने ही समय में देखता भी रहता है और पिछली राशि को यह इतने ही समय में उसके पीछे भी प्रभाव रखता है इसलिए 3 राशियों के प्रभाव में यह 3 राशियों का जोड़ लेने से इसके 7 साल और 6 महीने तक रहता है

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