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Navratara and NavSamvat 2080 Pingal

जय श्री राम दोस्तों

ज हम बात करेंगे नवरात्रों की और नए संवत की |

नया संवत जिसको हम देसी नया वर्ष भी कहते हैं|

नव वर्ष भारतीय सभ्यता के अनुसार चैत्र के नवरात्रों में प्रथम नवरात्रि को शुरू हो जाता है

और इसी दिन से चैत्र के नवरात्रि भी शुरू हो जाते हैं

इंग्लिश में यह मार्च का महीना होता है अमावस्या के बाद जो शुक्ल पक्ष की पहली तिथि आती है

उस दिन से पहला नवरात्रा शुरू होता है |

नया देसी नव वर्ष

और नया देसी नव वर्ष भी शुरू हो जाता है, इसको हम संवत कहते हैं और

इस बार यह संवत मार्च 2023 को बुधवार को शुरू हो रहा है

यह पिंगल नाम का संवत है पिंगल नाम से इस संवत की शुरुआत हो रही है और यह 2080 संवत शुरू होगा

और आगे जो भी पूजा या संकल्प होगा उसमें संवत 2080 पिंगल नामक संवत से शुरुआत होगी |

यह मंगलवार को रात्रि 10:13 पर उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और शुक्ल योग कालीन वृश्चिक लग्न में होगा शास्त्र एवं प्रचलित परंपरा अनुसार

और राजा का निर्णय भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के वार के अनुसार ही किया जाता है |

बुधवार से नव संवत का प्रारंभ होने से आगामी वर्ष संवत का राजा भी बुध ही होग संबंध का निर्णय भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा में विद्यमान संवत्सर को ही दिया जाता है जो कि नल लगभग 28 मार्च 2022 से 23 मार्च 2023 तक विद्यमान रहेगा

जबकि पिंगल नामक संवत्सर 24 मार्च 2023 से 24 मार्च 2024 तक रहेगा अतः स्पष्ट है कि विक्रमी संवत 2080 से केवल 2 दिन बाद प्रारंभ हो जाएगा| शास्त्र परंपरा में विद्यमान धार्मिक अनुष्ठान पाठ दान आदि संकल्प कार्यों को आरंभ में प्रयोग किया जाता है| इसलिए 24 मार्च 2023 से पिंगल नामक संवत्सर रहने से पिंगल को ही विक्रमी संवत 2080 में ऊंचारित किया जाएगा| धार्मिक और कर्मकांडी विद्वान 24 मार्च 2023 वी के बाद सभी प्रकार के संकल्प कार्यों में संवत आरंभ नल पर वर्तमान पिंगल नामक संवत्सर का प्रयोग करना चाहिए| वर्ष का राजा बुध और मंत्री शुक्र होगा

नव संवत्सर का वास

अर्थात समय का वास रोहिणी का वास तट पर होने से संवत का वास धोबी के घर में होगा

स्वरूप वर्षा विपुल एवं उत्तम मात्रा में होगी

और गेहूं चने गन्ना ईख मकई हरी सब्जियां वृक्षों फलों का उत्पादन अच्छा होगा|

लोगों में सुख और ऐश्वर्या के साधन बढ़ेंगे| कुए तालाब नदी नाले दरिया आधी जलापूरित रहेंगे |

नव संवत्सर का वाहन विक्रमी संवत 2080 का राजा बुध होने से संवत का वाहन गीदड़

होने से देश के विभिन्न भागों में विशेषकर दक्षिण उत्तरी प्रांतों में शासन परिवर्तन विग्रह

एवं राजनीतिक उथल-पुथल होगी| कहीं खाद्यान्न की कमी रहेगी और उनके मूल्यों मे विशेष

तेजी बनी रहेगी आर्थिक परेशानियां बढ़ेंगी| कुछ विद्वान राजा बुध होने से संवत का वाहन

सियार को भी मानते हैं | सियार वाहन होने से पृथ्वी पर हाहाकार मच जाता है व्यापक दुर्भिक्ष और बहुत

भयानक सूखा और अकाल जने प्रतियां बनती रहेंगी विभिन्न देशों के टुकड़ों में अर्थ होता रहेगा वर्ष का राजा

हो उस वर्ष पृथ्वी पर वर्षा अच्छी है

घर में विवाह मंगल कार्य उत्सव होंगे लोगों में दान धर्म आदि के प्रवृत्ति

बढ़ेगी विशेष वर्ग के लोगों में धन-धान्य सुख साधन समृद्धि बढ़ेगी व्यापार प्रभावित होंगे नव संवत्सर

का मंत्री शुक्र होने से ऐश्वर्या और सौन्दर्य ,फैशन परस्ती का प्रचार अधिक होगा |

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