fbpx
Vedic Astrology Vastu Uncategorized Mata Durga Ke NavRoop

Mata Durga Ke NavRoop

Mata Durga Ke NavRoop

जय माता दी दोस्तों आज हम बात करेंगे मां दुर्गा के नौ रूपों की मां दुर्गा के नौ रूप हैं

जय माता के नौ रूपों का वर्णन दुर्गा सप्तशती ग्रंथ में दिया गया है और

जय दुर्गा सप्तशती जो है जय मार्कंडेय ऋषि जी ने लिखी थी Mata Durga Ke NavRoop

मारकंडे जी ने तब ब्रह्मा जी से कहा था कि जो इस संसार में परम गोपनीय तथा सब मनुष्य की रक्षा करने वाला जो ग्रंथ है जो आपने किसी से नहीं कहा वह आप मुझे बताइए तब ब्रह्माजी ने मार्कंडेय ऋषि को यह माता के कवच का जो ज्ञान है

वह उनको बतलाया था तब ब्रह्मा जी ने मार्कंडेय जी को कहा था कि तुम प्राणियों के उपकार करने वाला जय मां नव दुर्गा के नौ रूप हैं इसको सुनो, जय इन्हें नवदुर्गा भी कहते हैं और इनके अलग-अलग नाम बतलाए गए हैं

पहली माता का नाम शैलपुत्री है शैलपुत्री जो है वह गिरिराज हिमालय की पुत्री पार्वती देवी थी जबकि ईश्वरी है और हिमालय की तपस्या और प्रार्थना से प्रसन्न होकर कृपा रूप मे उनकी पुत्री के रूप में प्रकट हुई थी यह बात पुराणों में प्रसिद्ध है और

Mata Durga Ke NavRoop

दूसरी माता का नाम ब्रह्मचारिणी है ब्रह्मचारिणी जो जिसका सच्चिदानंद में ब्रह्मा स्वरूप की प्राप्ति कराना जिनका स्वभाव है उनको हम ब्रह्मचारिणी कहते हैं यह माता ब्रह्मचारिणी यों की देवी है

ब्रह्मचारी लोग ब्रह्मचारी माता की उपासना करते हैं जय माता का दूसरा रूप है और

तीसरी माता का नाम चंद्रघंटा है चंद्रमा जिनकी घंटा में स्थित है और उस देवी का नाम चंद्रघंटा है

चौथी जो माता है वह कुष्मांडा है अर्थात त्रिविध ताप युक्त संसार जिनके पेट में स्थित है

उस भगवती माता कुष्मांडा कहलाती है उसके बाद स्कंदमाता आती है संत कुमार का नाम सकंद है

छन्दोग्य सूची के अनुसार भगवती की शक्ति से उत्पन्न हुए संत कुमार का नाम स्कंद है उनकी माता होने से जय स्कंदमाता कहलाती है

उसके बाद माता का नाम कात्यानी है देवताओं के कार्य सिद्ध करने के लिए देवी

महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट हुई महर्षि ने उन्हें अपनी कन्या माना इसलिए यह कात्यानी नाम से प्रसिद्ध हुई और

सब को मारने वाली काल की विनाश का होने से उसका नाम कालरात्रि है इन्होंने तपस्या द्वारा माता ने काल की तपस्या करके कालरात्रि कही गई , यह विनाश करने वाली है

उसके बाद महागौरी इन्होंने तपस्या करके महागोर वर्ण प्राप्त किया था इसलिए महागौरी कहलाती है

उसके बाद सिद्धिदात्री माता 9वी माता है जय सिद्धि और मोक्ष को देने वाली है इनको सिद्धिदात्री कहते हैं

इस तरह के नौ रूप माता के होते हैं जय माता दी

Mata Durga Ke NavRoop
https://vedicastrologyvastu.com/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post

Sun The king of PlanetSun The king of Planet

सूर्य शांति के लिए ज्योतिष के उपाय “surya dev pooja”सूर्य क्रूर ग्रह से दृष्ट युक्त अथवा अपनी नीच राशि तुला में हो तो सूर्य अशुभ माना जाता है जन्म कुंडली