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Ganpati Stahpana

Ganpati Stahpana Utsav

श्री गणेशाय नमः

दोस्तों आज हम बात करने जा रहे हैं|

श्री गणपति उत्सव की भगवान गणेश जी का जी उत्सव सरादो से पहले आता है

|और यह सभी में अपना रंग भर देता है|

हमारे हिंदू धर्म में 5 देवताओं की अवधारणा बड़ी स्पष्ट है|

5 devta में शिव ,विष्णु, सूर्य देवी, दुर्गा माता और भगवान गणेश जी|

इनको सम्मिलित किया गया है| गणेश जी बुद्धि के देवता हैं|

इनसे हमें विवेक भी मिलता है|

और भगवान सूर्य देव आरोग्यता प्रदान करते हैं| भगवान विष्णु की उपासना से हमें धन संपत्ति और लक्ष्मी की सद्गुणों की प्राप्ति होती है |

माता दुर्गा देवी बल और निर्मिता की दात्री है|

जिससे हमें हिम्मत आती है|

और भगवान शिव ने शिव को बाहरी और इंद्रले शत्रुओं पर विजय दिलाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करते हैं |

और आज हम बात करेंगे भगवान गणेश जी |

हिंदुओं के आराध्य देवता होने के साथ-साथ विघ्नों के विनाश भी करते हैं|

आइए देखते हैं कि गणेश से संबंधित इन मान्यताओं का आधार क्या है|

पुराणों में गणेश जन्म से जुड़ी बहुत सारी कथाएं मिलती हैं|

यह माना जाता है|

कि

गणेश जी का जन्म किस दिन हुआ|

गणेश जी का जन्म किस दिन हुआ|

उस दिन को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है|

शिव puran से पता लगता है|

माता पार्वती ने स्नान से पूर्व अपने मल से एक बालक को उत्पन्न करके|

उसे द्वार पर बना दिया और जब भगवान शिव के अंदर प्रवेश करना|

चाहा तो बालक ने उन्हें भीतर नहीं जाने दिया और तब शिव Gano का उस बालक के साथ भयंकर युद्ध हुआ |

और अंत में भगवान शंकर जी आए और उनके साथ जब शुरू हुआ||

तो उन्होंने गुस्से में आकर त्रिशूल से बालक का सिर काट दिया भगवती माता और उन्हें शांत करने |

के लिए शिव ने एक हाथी का {गज का} मस्तक बालक के dhar पर रखकर उसे दोबारा जीवित कर दिया|

गजानन जानी हाथी और गजानन भगवान शंकर ने बालक को विघ्नहर्ता होने; का वरदान देकर उसे गणों का अध्यक्ष बना दिया |

इस तरह उनका नाम हुआ|

गणेश जी यह घटना भद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी ने अपने वर्तमान स्वरूप को अवतरित हुए|

उनकी जन्मतिथि माना जाता है|

भगवान गणेश जी को सबसे पहले पूजा करने वाला देवता

ताकि उनके भगवान गणेश जी को सबसे पहले पूजा करने वाला देवता,

बना दिया शिवपुराण; में वर्णित है विद्वानों के अनुसार गणेश जी के रूप में मान्यता मिल चुकी है|

गणेश जी की पूजा का आरंभ हुआ; छत्रपति शिवाजी महाराज की मां जीजाबाई ने गणपति की प्रतिमा की स्थापना की थी ||

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हमें गणेश जी से सीखना चाहिए के समर्पण और अनुशासन के साथ हम हर काम पूर्ण करें ऐसी मान्यता है

कि महाभारत लिखने के लिए श्री गणेश जी को चुना गया और साथ ही यह शर्त रखी गई कि

उन्होंने बिना रुके महाभारत लिखने की शर्त रखी और महाभारत लिखने लग गए

और एक वक्त ऐसा आया जब गणपति जी की लेखनी लिखते लिखते टूट गई तो उन्होंने अपने एक दांत को तोड़कर इसे अपनी लेखनी बना लिया

इसलिए भी गणपति जी को एकदंत भी कहा जाता है गणपति जी के इस प्रसंग से हमें यह सीख मिलती है

कि हमें समर्पण और अनुशासन के साथ अपना काम पूरा करना चाहिए जय श्री गणेश

श्राद्ध से पहले गणपति पूजा खत्म हो जाती है|

गणपति पूजा 10 दिन घर में पूजा कर के बाद में पूजा सामग्री का विसर्जन कर दिया जाता है |

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