Vedic Astrology Vastu Gand Mool Nakshtra Remadise.

Gand Mool Nakshtra Remadise.

Gand Mool Nakshtra Remadise

Gand Mool Nakshtra Remadise.

Friends, today we will talk about constellations.

constellations have their own importance in astrology, when any child is born.

it is first seen in which constellation he is born and the constellation in which he is born.

Its zodiac is seen and it is named by the letters of the same zodiac.

there are 3 constellations in a zodiac and the name is placed on the letter of the constellation.

there are 28 constellations in astrology, out of which one constellation is not recognized.

so sometimes- Sometimes it is also called 27 Nakshatras.

Out of these 6 Nakshatras come in Gand Mool Nakshatras,

In which when a child is born then it is called Gand Mool Nakshatra.

Gand mool Nakshtra Dosha Remedies.

For the people born in Ashwani, Magha, Mula, Ashlesha, Jyeshtha, and Revathi Nakshatras,

The Mercury should be worshiped and green things should be donated on Wednesdays.

Gand Mool Shanti Puja should be performed on the 27th day of the birth of a child of a born in Gandmool,

Gand Mool Shanti pooja, havan,Gand mool Nakshatra mantra jap  apart from giving donations Dakshin, and  Brahmans give bless your child.

दोस्तों आज हम बात करेंगे नक्षत्रों की.

ज्योतिष में नक्षत्रों का अपना ही महत्व होता है,

किसी भी बालक का जब जन्म होता है तो सबसे पहले यह देखा जाता है,

कि वह किस नक्षत्र में पैदा हुआ है.

और जिस नक्षत्र में पैदा हुआ है,

उसी से उस की राशि देखी जाती है.

और उसी राशि के अक्षरों से उसका नामकरण होता है,

एक राशि में 3 नक्षत्र आते हैं और नक्षत्र के अक्षर के ऊपर नाम रखा जाता है,

नक्षत्र ज्योतिष में 28 हैं उसमें से एक नक्षत्र को मान्यता प्राप्त नहीं है.

इसलिए कभी-कभी यह 27 नक्षत्र भी कहलाते हैं.

इन नक्षत्रों में 6 नक्षत्र गंड मूल नक्षत्रों में आते हैं.

इनमें जब बालक पैदा होता है तब वह गंड मूल नक्षत्र में कहलाता है.

दोस्तों आज हम बात करेंगे नक्षत्रों की तो नछत्तर जो होते हैं.

वह 28अकाश में स्थित होते हैं 28 में से एक नक्षत्र को मान्यता प्राप्त नहीं है.

27 नछत्तर ज्योतिष में गिने जाते.

27 नछत्तर ज्योतिष में गिने जाते हैं और इन नक्षत्रों में ही राशियां बनती हैं.

3 नक्षत्र एक राशि बनती है और इसी से ही ग्रहों की महादशा गिनी जाती हैं,

इसलिए ज्योतिष शास्त्र में नक्षत्रों का बहुत महत्व है,

नक्षत्रो से ग्रहों के दिशा निर्देश का पता चलता है.

हम आज बात करेंगे 28 नक्षत्रो की अश्विनी भरणी कृतिका रोहिणी मृगशिरा आर्द्रा पुनर्वसु पुष्या अश्लेषा पूर्वाफाल्गुनी उत्तराफाल्गुनी.

हस्त चित्रा स्वाति विशाखा अनुराधा जयेष्ठा मूला पूर्वाषाढ़ा उत्तरा षाढा श्रवन घनिष्ठा शतभिषा पूर्वाभाद्रपद उत्तराभाद्रपद और रेवती ये 27 हैं,

.वह हम आपको बताते हैं.

अश्वनी अश्लेषा मघा ज्येष्ठा मूला और रेवती 6 नक्षत्र गंड मूल नक्षत्र कहलाते हैं.

जिनमें अगर किसी बालक बालिका का जन्म हो तो वह अपने माता पिता को कष्ट देती है,

इसकी शांति करवा कर ही पूजा करवा कर ही बच्चे का मुख देखना चाहिए

तो इसका बुरा असर नहीं होता बल्कि ग्रह नक्षत्र अच्छा फल देने लग जाते हैं

गंड मूल नक्षत्र शांति का विधान.

गंड मूल क्षेत्रों के शांति का विधान अलग-अलग तरह का होता है,

जैसे पश्चिमी क्षेत्र में अश्वनी देवता की पूजा होती है और उसका 5000 मंत्रों का पाठ होता है .

अश्लेषा नक्षत्र में सर्प देवता की पूजा होती है और उसका 10000 मंत्रों का पाठ भी होता है,

मूला नक्षत्र में पितरों की पूजा होती है और उसमें भी 10000 मंत्रों का पाठ होता है.

ज्येष्ठा नक्षत्र में इंद्र देवता की पूजा होती है और इंद्र देवता का 5000 मंत्रों का पाठ होता है.

मूल नक्षत्र में नर्ताया देवता की पूजा होती है और उसका भी 5000 मंत्रों का पाठ होता है.

उसके बाद रेवती में पूषा देवता की पूजा होती है.