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मां दुर्गा के नवरात्रि BY vedicastrologyvastu

जय श्री राम दोस्तों
आज हम बात करेंगे आने वाले नवरात्रों की मां दुर्गा के नवरात्रि 15 अक्टूबर 2023 रविवार को शुरू हो रहे हैं |

10:24मिनट में घट स्थापना का मुहूर्त है|

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष के नवरात्रि रविवार से शुरू हो जाएंगे|

इस दिन स्नान करने के बाद मां दुर्गा का ध्यान आदि के बाद मिट्टी के शुद्ध पात्र में जो गेहूं के बीज रेत मिट्टी डालकर बिजनेस चाहिए|

जिसको हम खेतरी कहते हैं|

इसको अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग नाम से बुलाते हैं |

माता दुर्गा की मूर्ति के आगे अखंडदीप प्रज्वल करके कलश की स्थापना करनी चाहिए|

फिर १६ प्रकार से पूजन सहित मां दुर्गा की पूजा संकल्प पूर्वक करके पहले नवरात्रि से लेकर 9 में नवरात्रि तकदेवी के सामने दीप जलाकर|

श्री दुर्गा सप्तशती का नियमित रूप से पाठ करना चाहिए |

पहले नवरात्रि के दिन चित्रा नक्षत्र और वेदरीति अशुभ योग होने से शास्त्र अनुसार प्रातः 10:24 के बाद कलश की स्थापना करनी शुभ होगी|

Translated “जय श्री राम दोस्तों आज हम बात करेंगे माता के नवरात्रों की | नवरात्रों में माता दुर्गा की पूजा की जाती है देवी के नौ रूपों को नवदुर्गा कहते हैं | यह नौ रूप हैं माता शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा कूष्मांडा स्कंदमाता कात्यायनी माता कालरात्रि महागौरी और सिद्धिदात्री यह नौ देवियां ना होते हुए देवी के जीवन के 9 चरणों का प्रतीक है इस प्रकार नवरात्रों के 9 दिनों में देवी के संपूर्ण जीवन को मनाया जाता है देवी वह शक्ति है जिनसे शिव को संपूर्ण अर्थ मिला | देवी के जीवन के पहले चरण में पर्वतों की पुत्री हिमाचल राज की पुत्री शैलपुत्री थी | उन्होंने पर्वत से जन्म लिया और वह पर्वतों में रहने वाले तपस्वी शिव से विवाह करना चाहती थी लेकिन शिव अपने तप में इतने तल्लीन थे कि इन्होंने विवाह करने से इंकार कर दिया| इसलिए देवी शिव की तरह तपस्विनी बन गई और वह प्रथम शैलपुत्री कहलाती है| इसके बाद माता के दूसरे चरण में वह ब्रह्मचारिणी बन गई | वह शिव को पाने के लिए तपस्या करने लगी इसलिए उनको ब्रह्मचारिणी कहते हैं | जह माता का दूसरा रूप है देवी को तपस्या करते हुए देखकर शिव को एहसास हुआ कि यदि शिव और शक्ति की तरह सभी पुरुष और स्त्री तपस्वी बन जाएंगे तो अगली पीढ़ी जन्म नहीं ले पाएगी और विश्व का आस्तिक रुक जाएगा | शिव जान गए कि शक्ति के बिना वह शव के समान हैं | इसलिए शिवलिंग के पत्थर को जीवन मिला और वह बिल का पौधा बन गया और शिव शक्ति से विवाह करने के लिए तैयार हुए| और देवी अपने तीसरा रूप लेकर चंद्रघंटा बन गई अर्थात घंटा के आकार का चंद्र बढ़ते हुए चंद्र के पहले दिन का प्रतीक है जबकि शिव करता हुआ चंद्र अर्थात विनाशक हैं शक्ति बढ़ता हुआ चंद्र और सृजन करता बन गई | शिव की पत्नी बनकर देवी ने उनकी सहकारिता का आनंद लिया| इससे उनके शरीर में गरम उष्णता का निर्माण हुआ और वह कुष्मांडा कहलाइ | पांचवें रूप में वह स्कंद की माता बन गई इसलिए स्कंदमाता कहलाइ | उत्तर भारत में कार्तिकेय नाम से और दक्षिण भारत में मुरूगन के नाम से प्रसिद्ध हैं | स्कंदमाता ने तपस्वी शिव को सभ्यता के अनुकूल बनाया और उन्हें पिता बनाया और गृहस्थ शंकर में बदल दिया अपने छोटे रूप में देवी क्रोधित योद्धा बन गई और उन्होंने महिषासुर से लड़ कर उसका वध किया| अभिमानी महिषासुर ने घोषणा की थी कि कोई उसे पराजित नहीं कर सकता| लेकिन वह भूल गया कि वह स्त्री के हाथों मारा जा सकता था | वामन पुराण के अनुसार सभी देवता महिषासुर को पराजित करने के उपाय ढूंढने के लिए जमा हुए थे| उनके क्रोध ने ऊर्जा किरणों का रूप लिया| जो कात्यायन ऋषि के आश्रम में जम गई और किरणों को देवी का रूप दिया इसलिए देवी के रूप को क् कहते हैं देवी का सातवां रूप कालरात्रि और भी भयंकर था इस रूप में उन्होंने…..

चंड़ और मुंड नामक असुरों का वध किया| यह देवी का सबसे उग्र रूप था | इस रूप के बाद वे शीघ्र ही शांत हो गई फिर देवी ने आठवां रूप लिया और वह महागौरी के रूप में ग्रहणी बन गई | और अपने पूर्व रूपों मे रणभूमि पर उन्मुक्त होकर दौड़ती थी| लेकिन महागौरी के रूप में देवी सभ्यता के और समाज के अनुकूल बन गई| उन्होंने अपने बाल बांध लिए और वह अन्नपूर्णा बनकर घर पर बैठी ताकि शिव को भोजन खिला सके| अपने अंतिम रूप में देवी सिद्धिदात्री बन गई | और उन्होंने अपना उद्देश्य पूरा किया और शिव को संसार इस जीवन से जोड़ना और उन्हें अपने उद्देश्य का एहसास दिलाना शिव का उद्देश्य विश्व को अपने समय के मूल्य का एहसास दिलाना था | क्योंकि देवी ने अपना उद्देश्य पूरा किया वह शिव के शरीर का एक आधा भाग बन गई| इसलिए शिव शक्ति कहलाए इस प्रकार देवी ने शिव को पूर्ण बनाया| यह देवी की सबसे बड़ी सफलता थी हिंदू शास्त्र में देवी की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका यही है |
जय श्री राम जी
जय माता दी

Maa Durga Of The Coming Navratris

Jai Shri Ram Friends
Today we will talk about the Navratri of Mother Durga of the coming Navratris, starting on Sunday, 15 October 2023.

The auspicious time of establishment of Ghat is at 10:24 minutes.

Navratri will start from Sunday of Shukla Paksha of Ashwin month.

On this day, after taking bath and meditating on Maa Durga,

A business should be started by putting wheat seeds and sand in a pure earthen pot

Which we call Khetri.

It is called by different names in different regions.

The Kalash should be installed along with the metro stage by lighting the sacred lamp in front of the idol of Mata Durga.

Then, after worshiping Maa Durga with determination in 16 ways,

One should regularly recite Shri Durga Saptashati by lighting a lamp in front of the goddess from

The first Navratri till the 9th Navratri.

According to the scriptures, due to the inauspicious combination of Chitra

Nakshatra and Vedariti on the first day of Navratri,

it will be auspicious to install the Kalash after 10:24 am.

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